प्रकृति, आस्था और समृद्धि के पर्व में उमड़ा उत्साह, जनप्रतिनिधियों व नगरवासियों ने निभाई परंपरा
सरगांव। नगर पंचायत सरगांव में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपरा, प्रकृति और आस्था से जुड़े भोजली तिहार को हर्षोल्लास एवं श्रद्धा के साथ मनाया गया। पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच आयोजित भोजली तिहार में नगरवासियों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई। कीर्तन मंडली के साथ पारंपरिक भोजली गीतों का सामूहिक गायन करते हुए नगर के देवी-देवताओं का आशीर्वाद लिया गया। इसके बाद श्रद्धापूर्वक भोइना तालाब में भोजली का विसर्जन किया गया।

भोजली तिहार छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का महत्वपूर्ण पर्व है, जो प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, सुख-समृद्धि की कामना और आपसी भाईचारे का संदेश देता है। इस पर्व में भोजली को बहनों-बेटियों द्वारा श्रद्धा से तैयार कर उसकी पूजा-अर्चना की जाती है और विसर्जन के साथ लोक परंपरा को आगे बढ़ाया जाता है। यही वजह रही कि सरगांव में आयोजित भोजली तिहार में बच्चों से लेकर बुजुर्गों और माताओं-बहनों तक सभी की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली।

नगर पंचायत अध्यक्ष परमानंद साहू ने कहा कि, “भोजली तिहार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी छत्तीसगढ़ी पहचान और सदियों पुरानी लोक परंपराओं का उत्सव है। इस पर्व में प्रकृति के प्रति सम्मान, सुख-समृद्धि की कामना और समाज में आपसी प्रेम एवं भाईचारे की भावना निहित है। नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना हम सभी की जिम्मेदारी है।”

वहीं भाजपा मंडल अध्यक्ष पोषण यादव ने कहा कि, “भोजली तिहार हमारी मिट्टी से जुड़ी ऐसी परंपरा है, जिसमें गांव-नगर की सामूहिकता और छत्तीसगढ़ की संस्कृति की सुंदर झलक दिखाई देती है। ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने के साथ समाज में एकता और सद्भाव को भी मजबूत करते हैं। हमें अपनी लोक परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक गर्व के साथ पहुंचाना चाहिए।”

कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष पोषण यादव, नगर पंचायत अध्यक्ष परमानंद साहू, उपाध्यक्ष श्रीमती पूजा कमल कौशिक, पूर्व अध्यक्ष रामजुड़ावन साहू, पार्षद महेश साहू, मनोज यादव, श्रीमती जमुना पाड़े, श्रीमती सविता कौशिक, श्रीमती सुषमा यादव, विधायक प्रतिनिधि तरुण अग्रवाल, पवन साहू, शिव पाण्डेय, ललित यादव सहित बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे।
पारंपरिक भोजली गीतों की गूंज और श्रद्धा के माहौल के बीच हुए विसर्जन के साथ नगर में भोजली तिहार की खुशियां और छत्तीसगढ़ी संस्कृति की रंगत देखने को मिली।




