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हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, मुर्गे पर होगी विदाई! 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि, जानिए घटस्थापना से विजयादशमी तक का पूरा कैलेंडर

धड़कन छत्तीसगढ़ | धर्म-संस्कृति विशेष

नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के साथ शुरू होगी मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना; 17 अक्टूबर से सप्तमी, 19 को दुर्गाष्टमी और 20 अक्टूबर को विजयादशमी। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस वर्ष देवी का आगमन गज यानी हाथी पर और प्रस्थान चरणायुध वाहन पर होगा।

शारदीय नवरात्रि 2026: शक्ति की आराधना का पर्व 11 अक्टूबर से


शक्ति की उपासना, आस्था और भक्ति का महापर्व शारदीय नवरात्रि इस वर्ष 11 अक्टूबर, रविवार से प्रारंभ होगा। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करेंगे। घरों और देवी मंदिरों में घटस्थापना, अखंड ज्योति, जगराता, भजन-कीर्तन तथा विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियां की जाएंगी।
इस वर्ष नवरात्रि को लेकर एक विशेष धार्मिक मान्यता भी चर्चा में है। परंपरागत पंचांग गणना के अनुसार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जा रहा है, जबकि विजयादशमी के दिन देवी के प्रस्थान का वाहन चरणायुध बताया गया है, जिसे परंपरा में मुर्गे से जोड़ा जाता है।
नवरात्रि का समापन 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ होगा। इसी दिन देशभर में दशहरा पर्व मनाया जाएगा।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त कब?
नवरात्रि के प्रथम दिन अश्विन शुक्ल प्रतिपदा पर घटस्थापना कर मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। पंचांग के अनुसार 11 अक्टूबर को घटस्थापना का सामान्य मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक बताया गया है। अभिजित मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा।
धार्मिक परंपरा के अनुसार घटस्थापना के साथ ही नौ दिवसीय पूजा, व्रत और साधना का संकल्प लिया जाता है। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा-अर्चना करेंगे।

शारदीय नवरात्रि 2026: दिनवार पूजा कैलेंडर
नौ दिन, मां के नौ स्वरूप
तारीख तिथि एवं पूजा
11 अक्टूबर, रविवार प्रतिपदा — घटस्थापना, मां शैलपुत्री
12 अक्टूबर, सोमवार द्वितीया — मां ब्रह्मचारिणी
13 अक्टूबर, मंगलवार तृतीया — मां चंद्रघंटा
14 अक्टूबर, बुधवार चतुर्थी — मां कूष्मांडा
15 अक्टूबर, गुरुवार पंचमी — मां स्कंदमाता
16 अक्टूबर, शुक्रवार षष्ठी — मां कात्यायनी
17 अक्टूबर, शनिवार सप्तमी — मां कालरात्रि
18 अक्टूबर, रविवार सप्तमी तिथि का विस्तार
19 अक्टूबर, सोमवार अष्टमी — मां महागौरी की आराधना
20 अक्टूबर, मंगलवार नवमी/विजयादशमी का पर्वकाल — मां सिद्धिदात्री की पूजा एवं दशहरा
स्रोत: 2026 का शारदीय नवरात्रि पंचांग। तिथि-समाप्ति और पर्व-निर्णय में स्थान तथा सूर्योदय के अनुसार अंतर संभव है।

सप्तमी, अष्टमी और नवमी को लेकर क्या है विशेष?
इस वर्ष नवरात्रि के मध्य दिनों में तिथियों के विस्तार और संयोग के कारण पूजा के दिन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता रहेगी। उपलब्ध पंचांग विवरण में 17 और 18 अक्टूबर को सप्तमी तिथि का उल्लेख है। 19 अक्टूबर को अष्टमी तथा 20 अक्टूबर को नवमी और विजयादशमी का पर्वकाल बताया गया है।
दुर्गाष्टमी और महानवमी पर देवी की विशेष पूजा, हवन, कन्या पूजन तथा भोग-प्रसाद की परंपरा निभाई जाती है। हालांकि, कन्या पूजन और हवन का समय स्थानीय पंचांग तथा परिवार की परंपरा के अनुसार निर्धारित करना उचित रहेगा।

हाथी पर मां दुर्गा का आगमन क्यों माना जाता है?
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान के वाहन का निर्धारण सप्ताह के दिन के आधार पर किया जाता है। मान्यता है कि रविवार और सोमवार को देवी का आगमन गज यानी हाथी पर होता है।
इसी परंपरा के अनुसार 11 अक्टूबर, रविवार को नवरात्रि प्रारंभ होने के कारण इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जा रहा है। धार्मिक प्रतीक के रूप में हाथी को स्थिरता, समृद्धि, ऐश्वर्य और वर्षा से जोड़कर देखा जाता है।


मुर्गे पर विदाई की क्या है धार्मिक मान्यता?
नवरात्रि के समापन पर देवी के प्रस्थान वाहन को लेकर भी धार्मिक परंपराएं प्रचलित हैं। मान्यता के अनुसार मंगलवार और शनिवार को देवी का प्रस्थान चरणायुध वाहन पर होता है। चरणायुध को कुक्कुट यानी मुर्गे से संबंधित माना जाता है।
इस वर्ष विजयादशमी मंगलवार को पड़ने के कारण मां दुर्गा की विदाई मुर्गे के वाहन पर मानी जा रही है। यह धार्मिक मान्यता है, जिसे श्रद्धालु पंचांग परंपरा के अनुसार देखते हैं।

नवरात्रि में होती है मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना
नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री से प्रारंभ होकर मां सिद्धिदात्री तक नौ देवियों की आराधना शक्ति, भक्ति और साधना का प्रतीक मानी जाती है।
इस दौरान श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मंदिरों में दर्शन करते हैं और घरों में पूजा-पाठ के साथ अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित करते हैं। अनेक स्थानों पर गरबा, डांडिया, भजन संध्या और देवी जागरण जैसे धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन भी किए जाते हैं।
नवरात्रि के दसवें दिन विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और धर्म की अधर्म पर जीत के प्रतीक के रूप में भी जाना जाता है।

धार्मिक सूचना एवं पंचांग संबंधी सावधानी
घटस्थापना के मुहूर्त और तिथि-निर्णय में शहर, सूर्योदय तथा स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है। ऊपर दिए गए समय संदर्भित पंचांग विवरण पर आधारित हैं। सरगांव, बिलासपुर, मुंगेली और आसपास के क्षेत्रों में पूजा का सटीक मुहूर्त जानने के लिए स्थानीय पंचांग या विद्वान पंडित से पुष्टि करें। देवी के आगमन और प्रस्थान के वाहन संबंधी विवरण धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं और धड़कन छत्तीसगढ़ द्वारा इन मान्यताओं की स्वतंत्र पुष्टि नही की गई है अतएव अमल में लाने से पहले सबन्धित विद्वान या विशेषज्ञ से सलाह लें।

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