बार-बार शिकायत के बाद भी नहीं चेता बिजली विभाग: झूलते 11 केवी तार ने ली किसान की जान, लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

पहले 12 मवेशियों की हो चुकी थी मौत, अब किसान की जान गई; ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों पर एफआईआर, मुआवजा और सुरक्षा ऑडिट की उठाई मांग

सरगांव। ग्राम पंचायत बिदबिदा में बिजली विभाग की कथित लापरवाही एक बार फिर जानलेवा साबित हुई। बुधवार सुबह खेत देखने जा रहे किसान मांघीलाल राजपूत (62) की झूल रहे 11 केवी बिजली तार की चपेट में आने से मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि खेत के पास बिजली का तार महज 4 से 5 फीट की ऊंचाई पर लटक रहा था, जिसकी शिकायत कई बार बिजली विभाग के अधिकारियों से लिखित और मौखिक रूप से की गई थी, लेकिन विभाग ने समय रहते सुधार नहीं कराया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शिकायतों पर कार्रवाई होती तो यह हादसा टाला जा सकता था। जानकारी के अनुसार मांघीलाल राजपूत बुधवार सुबह रोज की तरह हाथ में लाठी लेकर फूड पार्क के पास स्थित अपने खेत की ओर जा रहे थे। इसी दौरान झूल रहे 11 केवी बिजली तार का संपर्क उनके सिर से हो गया। तेज करंट लगने से उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी तब हुई जब परिजन खेत पहुंचे और उन्हें मृत अवस्था में देखा। सूचना मिलने पर सरगांव पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा कार्रवाई की तथा पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।

पहले भी हो चुके थे हादसे, फिर भी नहीं जागा विभाग

ग्रामीणों और गौ सेवा विकासखंड समिति के अध्यक्ष बृजेश शर्मा ने बताया कि इसी क्षेत्र में पहले भी बिजली तार के टूटने और लूज लाइन के कारण 12 गौवंशों की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी बिजली विभाग को कई बार शिकायतें की गईं। बृजेश शर्मा ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में थाना और सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन बिजली लाइन की मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

प्रशासन के पहुंचने में हुई देरी, ग्रामीणों में आक्रोश

ग्रामीणों का आरोप है कि घटना की सूचना देने के बाद भी प्रशासन को मौके पर पहुंचने में लगभग एक घंटे का समय लग गया। इस दौरान गौ सेवा विकासखंड समिति के अध्यक्ष बृजेश शर्मा अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर मौजूद रहे और लोगों को करंट की चपेट में आने से बचाने के लिए किसी को भी मृतक के पास नहीं जाने दिया। प्रशासन के पहुंचने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।

सरपंच बोले— शिकायतों पर कार्रवाई होती तो बच सकती थी जान

ग्राम पंचायत बिदबिदा के सरपंच अनिल राजपूत ने बताया कि गांव के किसानों के साथ मिलकर झूलते और जर्जर बिजली तारों की समस्या को लेकर कई बार सरगांव के कनिष्ठ यंत्री को लिखित एवं मौखिक शिकायत दी गई थी। बावजूद इसके विभाग ने समस्या का समाधान नहीं किया। उन्होंने कहा कि समय रहते बिजली लाइन को सुरक्षित ऊंचाई पर कर दिया जाता तो यह हादसा नहीं होता।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

घटना के बाद पूरे गांव में बिजली विभाग के प्रति भारी आक्रोश है। ग्रामीणों एवं सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि मृतक के परिजनों को शीघ्र पूर्ण मुआवजा दिया जाए, लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाए तथा पूरे क्षेत्र में झूलते और जर्जर बिजली तारों का तत्काल सुरक्षा ऑडिट कर उन्हें सुरक्षित किया जाए।

बिजली विभाग का पक्ष

सरगांव के कनिष्ठ यंत्री खगेश नेताम ने बताया कि लगातार बारिश के कारण बिजली का खंभा झुक गया था, जिससे 11 केवी लाइन नीचे आ गई और यह दुर्घटना हुई। उन्होंने बताया कि मृतक के परिजनों को तत्काल 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है तथा नियमानुसार लगभग 4 लाख रुपये का मुआवजा भी उपलब्ध कराया जाएगा।

हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभाग पूर्व में मिली शिकायतों को गंभीरता से लेकर समय पर सुधार कार्य करता, तो एक किसान की जान बचाई जा सकती थी। ऐसे में यह हादसा बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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