शहीद की पत्नी को सरगांव पुलिस ने दिया सम्मान का आमंत्रण, थाना प्रभारी ने घर पहुंचकर किया आत्मीय अभिनंदन

सरगांव। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों और उनके परिजनों के सम्मान की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सरगांव पुलिस ने मानवीय संवेदना और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश की। सरगांव थाना क्षेत्र के ग्राम मचहा निवासी शहीद स्वर्गीय श्री छात्रधारी जांगड़े की पत्नी श्रीमती चुलेश जांगड़े को 15 अगस्त के अवसर पर जिला मुख्यालय मुंगेली में आयोजित होने वाले सम्मान समारोह में शामिल होने के लिए पुलिस की ओर से सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया गया।

इसी क्रम में सरगांव थाना प्रभारी संतोष कुमार शर्मा स्वयं शहीद की पत्नी श्रीमती चुलेश जांगड़े के निज निवास, उस्लापुर, थाना सकरी, जिला बिलासपुर पहुंचकर उनसे आत्मीय भेंट की। थाना प्रभारी ने शहीद परिवार का सम्मान करते हुए स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने का विधिवत निमंत्रण दिया।

इस दौरान थाना प्रभारी संतोष कुमार शर्मा ने शहीद स्वर्गीय छात्रधारी जांगड़े के बलिदान को नमन करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और सम्मान के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर जवानों का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। शहीदों के परिजनों का सम्मान करना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि समाज और शासन-प्रशासन की नैतिक जिम्मेदारी है। उनके त्याग और परिवार के धैर्य से आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा मिलती है।

सरगांव पुलिस की इस पहल को शहीद परिवार के प्रति सम्मान, संवेदना और कर्तव्यबोध के रूप में देखा जा रहा है। थाना प्रभारी द्वारा स्वयं शहीद की पत्नी के घर पहुंचकर आमंत्रण देना पुलिस और शहीद परिवार के बीच सम्मान एवं आत्मीयता के रिश्ते को दर्शाता है।

स्वतंत्रता दिवस समारोह में शहीद परिवार को विशेष सम्मान
15 अगस्त को जिला मुख्यालय मुंगेली में आयोजित सम्मान समारोह में शहीद स्वर्गीय छात्रधारी जांगड़े की पत्नी श्रीमती चुलेश जांगड़े को सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, शहीद परिवारों और राष्ट्रसेवा से जुड़े लोगों के योगदान को स्मरण करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाएगी।

सरगांव पुलिस की इस पहल से यह संदेश भी सामने आया है कि राष्ट्र की सेवा में बलिदान देने वाले वीरों की स्मृति केवल राष्ट्रीय पर्वों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनके परिवारों के सम्मान और सम्मानजनक सहभागिता के माध्यम से उनके त्याग को सदैव जीवंत रखा जाना चाहिए।

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