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मुंगेली कोतवाली या मूकदर्शक थाना? अवैध गतिविधियों से लेकर लाखों की कथित ठगी तक, कार्रवाई पर उठ रहे गंभीर सवाल

मुंगेली। जिले की सबसे महत्वपूर्ण मानी जाने वाली सिटी कोतवाली इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा के केंद्र में है। शहर में कानून व्यवस्था, खुलेआम चल रही अवैध गतिविधियों और लाखों रुपये की कथित ठगी के मामलों में कार्रवाई को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि शिकायतें सामने आने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कोदवा बानी रोड, सूरहेटा रोड, बिलासपुर रोड, बस स्टैंड सहित कई सार्वजनिक स्थानों पर देर शाम से रात तक खुलेआम शराबखोरी और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। इन इलाकों में अक्सर विवाद और अव्यवस्था की शिकायतें सामने आती हैं, लेकिन हालात में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं देता।

शहरवासियों का सवाल है कि जब ये सभी क्षेत्र पुलिस की नियमित निगरानी वाले दायरे में आते हैं, तो आखिर नियमों की खुलेआम धज्जियां कैसे उड़ रही हैं? आखिर किसके संरक्षण में यह सब चल रहा है? यह सवाल अब आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।

अब ठगी की शिकायत ने बढ़ाई पुलिस की मुश्किलें


इसी बीच लोरमी क्षेत्र की एक युवती द्वारा सिटी कोतवाली में दी गई शिकायत ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रॉपर्टी और निवेश के नाम पर करीब 7 लाख रुपये की राशि लेकर कथित तौर पर धोखाधड़ी की गई।

शिकायतकर्ता ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया है कि एक कंपनी के माध्यम से आवासीय प्लॉट और मासिक लाभ का झांसा देकर उससे रकम निवेश कराई गई। शिकायत के अनुसार राशि बैंक खाते के माध्यम से ट्रांसफर की गई थी, जिसके बैंक दस्तावेज और अन्य प्रमाण भी पुलिस को सौंपे गए हैं। बावजूद इसके, शिकायतकर्ता का आरोप है कि अब तक मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

जनता पूछ रही— शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं?

लोगों का कहना है कि यदि दस्तावेजों और बैंक लेन-देन के प्रमाण के साथ शिकायत देने के बाद भी पीड़ितों को न्याय के लिए भटकना पड़े, तो पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। शहर में पहले से अवैध गतिविधियों को लेकर उठ रही शिकायतों के बीच अब कथित ठगी का मामला सामने आने से कोतवाली की कार्यशैली पर और गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।

कुर्सी का रौब या जिम्मेदारी से दूरी?”

जनचर्चा है कि थाना प्रभारी अपनी छवि और रौब दिखाने में ज्यादा व्यस्त हैं, जबकि जमीनी स्तर पर समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। लोगों का कहना है कि कानून व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी जिस अधिकारी के कंधों पर है, यदि वही शिकायतों के निराकरण और अपराध नियंत्रण को लेकर गंभीर नजर नहीं आए, तो जनता का भरोसा कमजोर होना तय है।

वरिष्ठ अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग

शहर के नागरिकों ने पुलिस अधीक्षक और वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा कराने, लंबित शिकायतों की जांच करवाने तथा शहर में चल रही अवैध गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

बड़ा सवाल

जब शहर के प्रमुख चौराहों पर खुलेआम शराबखोरी की शिकायतें हों, अवैध गतिविधियों पर सवाल उठ रहे हों और लाखों रुपये की कथित ठगी की शिकायतें भी कार्रवाई का इंतजार कर रही हों, तो क्या मुंगेली सिटी कोतवाली अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी गंभीरता से कर पा रही है?

मुंगेली की जनता जवाब चाहती है, क्योंकि मामला केवल एक थाना प्रभारी की कार्यशैली का नहीं, बल्कि पूरे शहर की सुरक्षा, कानून व्यवस्था और न्याय व्यवस्था पर भरोसे का है।

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