सरगांव – प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लू (हीट वेव) के प्रकोप के बीच विकास खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) पथरिया द्वारा जारी एक आदेश का संयुक्त शिक्षक संघ मुंगेली ने कड़ा विरोध किया है। बीईओ कार्यालय द्वारा जारी आदेश के तहत आगामी 25 मई से 29 मई तक व्याख्याताओं के लिए पांच दिवसीय ब्लूप्रिंट निर्माण एवं शिक्षण शास्त्र आधारित प्रशिक्षण का आयोजन किया गया है। इसका समय सुबह 10:00 बजे से शाम 05:00 बजे तक रखा गया है, जिसे लेकर शिक्षकों में भारी आक्रोश है।
सरकार की गाइडलाइन और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों की अनदेखी संयुक्त शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि एक तरफ राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग लगातार एडवाइजरी जारी कर आम जनता को दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक घरों से बाहर न निकलने की सलाह दे रहे हैं। अस्पतालों में हिट स्ट्रोक (लू लगना) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और मौसम विभाग ने भी रेड अलर्ट जारी किया है। ऐसे जानलेवा मौसम में शिक्षा विभाग के अधिकारी शासकीय निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए शिक्षकों को झुलसती धूप में लंबी दूरी तय करने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

शाम 5 बजे तक प्रशिक्षण से हिट स्ट्रोक का भारी खतरा संघ के अनुसार, पथरिया ब्लॉक के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों जैसे कुकुसदा, सिलदहा, अमोरा, मोतिमपुर, बावली, पत्थरगढ़ी सरगांव,अंडा आदि से व्याख्याताओं को लंबी दूरी तय कर बीआरसी पथरिया पहुंचना होगा। शाम 5 बजे प्रशिक्षण खत्म होने के बाद भी गर्म हवाएं चलती रहती हैं। ऐसे में शिक्षकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इस दौरान किसी भी शिक्षक के साथ अनहोनी होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी ब्लॉक शिक्षा प्रशासन की होगी। प्रशिक्षण ऑनलाइन करने या स्थगित करने की मांग संयुक्त शिक्षक संघ मुंगेली ने जिला प्रशासन और जिला शिक्षा अधिकारी से मांग की है कि इस भीषण गर्मी और लू को देखते हुए 25 मई से शुरू होने वाले प्रशिक्षण को आगामी अनुकूल मौसम तक तत्काल स्थगित किया जाए।
यदि यह कार्य समय-सीमा के भीतर बहुत जरूरी है, वर्तमान में पेट्रोल और डीजल की कमी और कीमत में वृद्धि के साथ साथ सरकार द्वारा ऑनलाइन कार्य को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा ताकि वैश्विक समस्या से बच सके। सैकड़ों व्याख्याताओं के प्रशिक्षण में बुलाने से हजारों लीटर तेल जलने की आशंका है। तो इसे भौतिक रूप से बुलाने के बजाय ‘ऑनलाइन माध्यम’ से आयोजित किया जाए, ताकि शिक्षक सुरक्षित रहकर कार्य कर सकें। संघ ने दोटूक कहा है कि यदि इस आदेश को निरस्त या संशोधित नहीं किया गया, तो शिक्षक अपने जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए इस प्रशिक्षण का पूर्ण बहिष्कार करने के लिए बाध्य होंगे।


