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मुख्यालय बना “सिर्फ कागजों का पता”❓ अधिकारी-कर्मचारी रोज दूरदराज से कर रहे अप-डाउन

कार्यालयीन अनुशासन पर उठे सवाल, आम जनता को समय पर नहीं मिल पा रही सुविधाए

घरघोड़ा।सरकारी दफ्तरों में पदस्थ कई अधिकारी और कर्मचारी मुख्यालय में निवास नहीं कर रहे हैं। शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अधिकांश कर्मचारी रोजाना दूर-दराज क्षेत्रों से आना-जाना कर रहे हैं, जिससे कार्यालयों की कार्यप्रणाली प्रभावित होने लगी है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी और कर्मचारी समय पर कार्यालय नहीं पहुंचते, वहीं शाम होते ही जल्दी निकल जाते हैं। इसका सीधा असर आम जनता के कामकाज पर पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, लेकिन संबंधित अधिकारी के नहीं मिलने से उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ता है।

*मुख्यालय में निवास अनिवार्य, फिर भी आदेशों की अनदेखी*

सरकारी नियमों के अनुसार कई विभागों में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारियों के लिए मुख्यालय में निवास करना अनिवार्य होता है, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। बावजूद इसके, कई कर्मचारी शहरों और दूसरे कस्बों से रोजाना अप-डाउन कर रहे हैं।

सूत्रों की मानें तो कुछ कर्मचारी देर से पहुंचने और जल्दी निकलने की “आदत” को सामान्य व्यवस्था बना चुके हैं। इससे कार्यालयों में आम दिनों के अलावा आकस्मिक परिस्थितियों में भी काम प्रभावित हो रहा है

जनता बोली — “कार्यालय खुलता है, लेकिन अधिकारी नहीं मिलते”

ग्रामीणों और फरियादियों का कहना है कि कई बार जरूरी कार्यों के लिए कार्यालय पहुंचने पर संबंधित अधिकारी अनुपस्थित मिलते हैं। कुछ मामलों में कर्मचारियों द्वारा “साहब रास्ते में हैं” या “आज बाहर गए हैं” जैसी बातें कहकर लोगों को टाल दिया जाता है।

लोगों का आरोप है कि मुख्यालय में निवास नहीं करने के कारण प्रशासनिक निगरानी भी कमजोर हो गई है और कर्मचारियों की जवाबदेही घटती जा रही है।

आपात स्थिति में कौन रहेगा जिम्मेदार?

स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है कि यदि किसी आपातकालीन स्थिति, दुर्घटना, राजस्व प्रकरण, स्वास्थ्य समस्या या कानून व्यवस्था से जुड़ी घटना में तत्काल अधिकारियों की जरूरत पड़े, तो मुख्यालय से दूर रहने वाले कर्मचारी कितनी जल्दी उपलब्ध हो पाएंगे?

प्रशासनिक सख्ती की मांग

क्षेत्र के नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मुख्यालय में निवास नहीं करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों की जांच कर कार्रवाई की जाए। साथ ही नियमित उपस्थिति और निवास सत्यापन की व्यवस्था लागू करने की भी मांग उठ रही है।

लोगों का कहना है कि सरकारी व्यवस्था तभी मजबूत होगी, जब अधिकारी और कर्मचारी अपने मुख्यालय में रहकर पूरी जिम्मेदारी और जवाबदेही के साथ कार्य करेंगे।

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