तूता, छत्तीसगढ़। सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के 2300 रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर डीएड अभ्यर्थी पिछले 2 हफ़्तों से आमरण अनशन पर अड़े हुए हैं। अनशन की अवधि में अभ्यर्थियों की हालत बिगड़ती जा रही है। अब तक 32 अभ्यर्थी गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाए जा चुके हैं, जिनमें चार की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। कई अभ्यर्थी बेहोश होकर गिर पड़े, फिर भी प्रशासन सुस्ती का शिकार बना हुआ है।
आंदोलन 24 दिसंबर से शुरू हुआ है। मार्च 2023 में राज्य सरकार ने 6285 सहायक शिक्षक पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था, जिसमें डीएड और बीएड दोनों को पात्र माना गया। 10 जून को परीक्षा और 2 जुलाई को परिणाम घोषित हुए। चार चरणों की काउंसलिंग में 5301 नियुक्तियां हुईं, लेकिन 984 पदों पर काउंसलिंग ही नहीं हो सकी।
हाईकोर्ट बिलासपुर ने 2 अप्रैल 2024 को और सुप्रीम कोर्ट ने 28 अगस्त 2024 को बीएड अभ्यर्थियों को अपात्र ठहराते हुए डीएड अभ्यर्थियों की मेरिट सूची पुनर्व्यवस्थित (रिअरेंजमेंट) कर सभी पदों पर नियुक्ति के निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने 26 सितंबर 2025 को दो माह के भीतर प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया, लेकिन सरकार ने इसका पालन नहीं किया। दिसंबर 2024 में केवल 2621 बीएड अभ्यर्थियों को हटाया गया और बिना रिअरेंजमेंट के पांचवीं काउंसलिंग की गई, जिसमें सिर्फ 1299 डीएड अभ्यर्थी चयनित हुए। नतीजा—2300 पद अब भी खाली हैं।
जन चेतना भारत पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जसबीर सिंह चावला ने कहा, “2300 सहायक शिक्षक रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग पर अड़े अभ्यर्थियों की मांग पर सरकार के कान पर जूं नहीं रेंग रही। डीएड अभ्यर्थियों की मांग सिर्फ लिस्ट रिअरेंज करके 2300 पदों पर तत्काल छठवें चरण की काउंसलिंग कर नियुक्ति दी जाए। बच्चों ने इतनी मेहनत कर परीक्षा पास की, अब लिस्ट में आने के बाद भी नियुक्ति न देना शासन-प्रशासन की हठधर्मिता दिखाता है। लोकतंत्र नहीं, अफसरशाही चल रही है।
“प्रदेश कोषाध्यक्ष अभिषेक बाफना बोले, “14 दिन से आमरण अनशन पर बैठे डीएड अभ्यर्थी, कई बेहोश होकर गिर पड़े, 30 की हालत भी गंभीर लेकिन प्रशासन भी सुस्त।”
प्रदेश महासचिव जयंत गायधने ने आरोप लगाया, “2023 की प्रवीण्य सूची को रिलिस्टिंग न कर पिछले दो साल से नियुक्ति न देना और अब अगली परीक्षा में बैठने कहना प्रशासन का युवाओं पर साजिश-अत्याचार समान है।”
अभ्यर्थी न्याय और तत्काल काउंसलिंग की मांग कर रहे हैं। आंदोलन जारी है, प्रशासन की चुप्पी से नाराजगी बढ़ रही है।


