स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर पहली बार सजा अखिल भारतीय कवि सम्मेलन; धरमलाल कौशिक की गरिमामयी मौजूदगी में देर रात तक बही हास्य, व्यंग्य और राष्ट्रभाव से सराबोर काव्यधारा
सरगांव। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर नगर पंचायत सरगांव का मंगल भवन उस समय शब्दों की ऐसी रोशनी से जगमगा उठा, जब पहली बार नगर की धरती पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन हुआ। मंच पर कविता थी, शब्दों में संवेदना थी, वीर रस में राष्ट्रभक्ति का ओज था और हास्य-व्यंग्य में जिंदगी की मुस्कान। देखते ही देखते मंगल भवन का सभागार तालियों, ठहाकों और काव्य की गूंज से देर रात तक सराबोर रहा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक रहे। उनके गरिमामयी आतिथ्य में आयोजित इस साहित्यिक संध्या ने सरगांववासियों को मनोरंजन के साथ-साथ कविता की विविध विधाओं से रूबरू कराया।

कविता ने बांधा ऐसा समां, समय भी जैसे ठहर गया
सरगांव में पहली बार आयोजित इस कवि सम्मेलन को लेकर नगरवासियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। मंगल भवन में बड़ी संख्या में श्रोता पहुंचे। जैसे-जैसे कवियों ने अपनी प्रस्तुतियां शुरू कीं, सभागार का माहौल और भी रंगीन होता चला गया।

कभी हास्य की फुहार ने श्रोताओं को हंसाया, तो कभी व्यंग्य की पैनी धार ने व्यवस्था और सामाजिक विसंगतियों पर सोचने को मजबूर किया। वीर रस की कविताओं ने वातावरण में जोश और राष्ट्रभक्ति का संचार किया, वहीं श्रृंगार और गीतों ने काव्य-संध्या को भावनाओं के अलग-अलग रंगों से सजा दिया।

ऐसा लगा मानो कविता स्वयं कह रही हो—
“शब्द जब दिल से निकलते हैं, तो असर छोड़ जाते हैं,
कुछ पल हंसी के होते हैं, कुछ आंखों में उतर जाते हैं।”
कवियों की प्रभावशाली प्रस्तुतियों पर श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साह बढ़ाया। हास्य-व्यंग्य के अंदाज ने पूरे सभागार को ठहाकों से गूंजा दिया और कई प्रस्तुतियों के दौरान श्रोता देर तक हंसते रहे।

वीर रस ने जगाया देशभक्ति का ज्वार
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या होने के कारण वीर रस की कविताओं ने आयोजन को विशेष ऊंचाई प्रदान की। राष्ट्रप्रेम, शौर्य और देश के वीर सपूतों को समर्पित काव्य पाठ ने श्रोताओं में देशभक्ति की भावना को और प्रखर किया।
काव्य की यही ताकत है कि वह कभी मुस्कुराती है, कभी गुदगुदाती है और कभी भीतर सोई देशभक्ति को जगा देती है। स्वतंत्रता दिवस की दहलीज पर सरगांव ने इसी काव्य शक्ति को महसूस किया।

देशभर से पहुंचे कवियों ने सजाई काव्य की महफिल
इस ऐतिहासिक आयोजन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कवियों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। रमेश विश्वहार (गीतकार, रायपुर), नीरज पांडे (वीर रस, रायबरेली), अमित शुक्ला (हास्य, रीवा), देवेंद्र परिहार (वीर रस, मुंगेली), कृष्णा भारती (हास्य, नांदघाट) और कल्पना कौशिक (श्रृंगार, सरगांव) ने अपनी-अपनी विधाओं में बेहतरीन काव्य पाठ कर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी।

कहीं शब्दों ने हंसाया, कहीं भावनाओं ने छुआ और कहीं ओजस्वी पंक्तियों ने दिल में देशप्रेम की लौ और तेज कर दी।
आयोजन को सफल बनाने में सहयोगियों की अहम भूमिका
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में नगर पंचायत अध्यक्ष परमानंद साहू, भाजपा मंडल सरगांव अध्यक्ष पोषण यादव, जनपद पंचायत पथरिया सभापति मनीष साहू, नगर पंचायत सरगांव उपाध्यक्ष प्रतिनिधि रामकुमार कौशिक, रघु सिंह ठाकुर श्री बालाजी टाइल्स सरगांव, हर्ष साहू-तुलसी हार्डवेयर सरगांव एवं कवि व वरिष्ठ पत्रकार निर्मल अग्रवाल का विशेष सहयोग रहा।

आयोजकों ने आयोजन को सफल और यादगार बनाने में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी सम्माननीय जनों, सहयोगियों और नगरवासियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। साथ ही देश के विभिन्न क्षेत्रों से सरगांव पहुंचे सभी कवियों का विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया, जिन्होंने अपनी हास्य, व्यंग्य, वीर रस, गीत और श्रृंगार की प्रस्तुतियों से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा।
सरगांव की सांस्कृतिक यात्रा में जुड़ा नया अध्याय
नगर में पहली बार आयोजित यह अखिल भारतीय कवि सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सरगांव की सांस्कृतिक चेतना में जुड़ा एक नया अध्याय बन गया। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सजी यह काव्य महफिल लोगों को हंसी, संवेदना, राष्ट्रभक्ति और साहित्य के अनेक रंगों से सराबोर कर गई।

रात बीत गई, मंच की रोशनियां बुझ गईं, कवि विदा हो गए, लेकिन शब्दों की गूंज और तालियों की आवाज लंबे समय तक नगरवासियों के मन में बनी रही।

क्योंकि कुछ आयोजन समाप्त नहीं होते—वे स्मृतियों में कविता बनकर बस जाते हैं।




